ख़िलाफते उस्मानिया की तरफ लौटते एर्दोगान- क्या तुर्की में फिर से ओट्मन साम्राज्य को ज़िंदा कर पाएंगे ?




मुस्तफा कमाल अतातुर्क के शासन के बाद से ही तुर्की पश्चिम सभ्यता की और झुकता हुआ नजर आया लेकिन एक बार फिर से तुर्की अब खिलाफते उस्मानिया के दौर की तरफ लौट रहा है.
वर्तमान राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान के शासन में तुर्की ख़िलाफते उस्मानिया की उन्ही पुरानी जड़ों को विकसित करने की कोशिश कर रहा है. जिसे अतातुर्क के शासन के बाद से ही भुला दिया गया था. रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, एर्दोगान इस्लामिक तालीम से एक नई पीड़ी खड़ी करना चाहते है. जो तुर्की में एक नई सभ्यता के निर्माण के लिए काम करेगी.
हाल के भाषणों में एर्दोगान ने तुर्की के ख़िलाफते उस्मानिया और पश्चिमी विचारों और प्रभावों पर घरेलू उपलब्धियों पर बल दिया है. इसके लिए एर्दोगान ने अपनी कोशिशे भी शुरू कर दी है. इस्लामिक तालीम के लिए अरबों डॉलर का धन दिया जा रहा है. स्कूलों में इमामों की नियुक्ति की जा रही है.
एक सरकारी सलाहकार ने रॉयटर्स को बताया कि इस्लाम लोगों को मजबूर नहीं करता है यह कहने का मामला नहीं है कि सभी को इस्लाम के बारें में जानना चाहिए. हम उन परिवारों को सिर्फ एक मौका प्रदान कर रहे हैं जो अपने बच्चों को इस्लामिक शिक्षा देना चाहते है.
अब देखना होगा कि एर्दोगान की ख़िलाफते उस्मानिया के पुनरुत्थान की योजना को तुर्की की जनता का कितना समर्थन मिलता है. वह भी ऐसी स्थिति में जब तुर्की के पश्चिम के साथ संघर्ष बढ़ रहे है.


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